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चेक बाउंस मामले में सख्त फैसला : विद्युत ठेकेदार नितिन मालवीय को 2 वर्ष का सश्रम कारावास, 26.32 लाख रुपये अदा करने का आदेश

खरगोन। चेक बाउंस जैसे गंभीर आर्थिक अपराध में न्यायालय ने ऐसा कड़ा फैसला सुनाया है, जिसने पैसों के दम पर कानून से बच निकलने का सपना देखने वालों की नींद उड़ा दी है। खरगोन निवासी नितिन मालवीय को दोषी पाते हुए न्यायालय ने दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 26 लाख 32 हजार 250 रुपये की भारी-भरकम राशि अदा करने का आदेश भी दिया है।

प्रकरण के अनुसार, आरोपी नितिन मालवीय ने करीब तीन वर्ष पूर्व परिवादी राकेश चौधरी को भुगतान के नाम पर 22 लाख 50 हजार रुपये का चेक थमाया था। जब परिवादी ने बैंक में चेक प्रस्तुत किया, तो वह खाते में अपर्याप्त राशि होने के कारण बाउंस हो गया। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया वित्तीय छल था, जिससे परिवादी को लंबे समय तक मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

न्याय पाने के लिए राकेश चौधरी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मामले की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री रोहित कुमार की अदालत में हुई, जहां दोनों पक्षों के साक्ष्य और तर्कों की गहन जांच के बाद न्यायालय ने 17 दिसंबर 2025 को अपना निर्णय सुनाते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चेक बाउंस कोई मामूली तकनीकी गलती नहीं, बल्कि विश्वासघात और आर्थिक अपराध है। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी को दो वर्ष का सश्रम कारावास दिया और परिवादी को क्षतिपूर्ति स्वरूप 22 लाख 50 हजार रुपये, साथ ही परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से चेक राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज जोड़ते हुए कुल 26 लाख 32 हजार 250 रुपये का भुगतान करने का आदेश पारित किया।

इस फैसले ने यह साफ संदेश दे दिया है कि धोखाधड़ी, ठेकेदारी का रौब और पैसों की ताकत अब कानून को गुमराह नहीं कर सकती। जो लोग चेक को खिलौना समझकर बाजार में भरोसे से खेलते हैं, उनके लिए यह निर्णय कड़ी चेतावनी है।

अब देखना यह होगा कि ऐसे मामलों के बाद भी क्या आर्थिक अपराधियों पर समय रहते नकेल कसी जाएगी या फिर वे संरक्षण की छाया में कानून को चुनौती देते ।

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