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भू-माफिया ने की कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश, पटवारी की समझदारी से खुल गया राज

भोपाल। भू-माफियाओं के हौसले किस कदर बुलंद है इसकी बानगी मध्य प्रदेश के ग्वालियर में देखने को मिली जहां कलेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर करके जालसाजों ने 20 बीघा सरकारी जमीन हड़पने की साजिश रच डाली किंतु पटवारी की सजगता ओर समझदारी से इसका खुलासा हो गया । इस साजिश के तहत फर्जी आदेश भी तैयार कर लिया गया था और उस पर अमल की पूरी प्लानिंग हो चुकी थी। हालांकि पटवारी की समझदारी से यह धोखाधड़ी उजागर हो गई और प्रारंभिक जांच के बाद कलेक्टर के रीडर लोकेश गोयल की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। IMG 20250216 WA0356

कलेक्टर के रीडर ने थाने में की शिकायत

ग्वालियर कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान के रीडर लोकेश गोयल ने यूनिवर्सिटी थाने में शिकायत कर बताया था कि कुछ जालसाजों ने न्यायालय के नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग करते हुए फर्जी तरीके से ग्राम जिरेना के सर्वे न. 528, 529 सहित 111 कुल 20 बीघा जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाए थे। उन्होंने बताया कि इस सरकारी जमीन को हड़पने के लिए प्रताप सिंह, गब्बर सिंह पुत्र मूलचंद सिंह माहौर ने कई अन्य लोगों से सांठगांठ कर न्यायालयीन प्रकरण का उल्लेख भी फर्जी आदेश में किया। जालसाज उक्त आदेश से पटवारी पर दबाव बना कर नाम दर्ज करने का प्रयास कर रहे थे ।

ऐसे खुला राज

पटवारी द्वारा आदेश की जांच जब आरसीएमएस पोर्टल से की गई, तो उसमें प्रताप सिंह और गब्बर सिंह का नाम नहीं था, बल्कि मैसर्स आधुनिक डेवलपर्स भागीदार फर्म जरें राजेंद्र सेठ का नाम लिखा था। इसमें 31 दिसंबर 2024 को आदेश पारित किया जा चुका था। पटवारी ने इसकी सूचना तत्काल अधिकारीयों को दि। गोयल ने पुलिस को बताया कि न्यायालय कलेक्टर और पक्षकार के नाम से जारी यह आदेश फर्जी है। आदेश में ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है, जो न्यायालयीन कार्यों में इस्तेमाल नहीं की जाती है। वहीं, फर्जी आदेश पत्र में ऊपर 20 दिसंबर और नीचे 25 दिसंबर 2024 की तारीख लिखी हुई थी। इसी आधार पर अब पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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