नई पीढ़ी में जागा धर्मभाव — भव्य शोभायात्रा ने किया जनमानस को प्रेरित
हरदा(सार्थक जैन)। नगर के जैन समाज के धार्मिक इतिहास में एक अत्यंत गौरवशाली और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया, जब जैन समाज के प्रतिष्ठित सिंघई परिवार द्वारा अपने सुपुत्र अव्यांश के जीवन के 8वें वर्ष में प्रवेश के शुभ अवसर पर श्रीजी के प्रथम अभिषेक का एक भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न किया गया।
इस पावन अवसर पर नगर के प्राचीन अतिशयकारी श्री 1008 शांतिनाथ भगवान के दिव्य जिनालय में स्वर्ण कलश से प्रथम अभिषेक का आयोजन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत कर दिया। बालक अव्यांश द्वारा इंद्र रूप में पूरे श्रद्धा, विनम्रता ओर धार्मिक क्रियाकलाप के साथ किया गया यह प्रथम अभिषेक सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
बचपन से संस्कार — भविष्य का उज्ज्वल आधार
आज के आधुनिक युग में जहाँ बच्चे डिजिटल दुनिया में अधिक व्यस्त रहते हैं, वहीं अव्यांश जैसे बालक यह संदेश दे रहे हैं कि धर्म, संस्कार और श्रद्धा जीवन की सच्ची नींव हैं। इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि यदि बच्चों को प्रारंभ से ही सही दिशा दी जाए, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि समाज के लिए भी आदर्श बन सकते हैं।
भव्य शोभायात्रा और धर्म प्रभावना
कार्यक्रम के अंतर्गत एक भव्य धर्म यात्रा एवं शोभायात्रा का आयोजन भी किया गया, जिसमें समाज के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह यात्रा जैन धर्म की गौरवशाली परंपराओं और अहिंसा, संयम एवं सत्य के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनी। श्रीजी के अभिषेक के पश्चात मंदिर में भक्तामर मंडल विधान का आयोजन पूरे भक्ति भाव से किया गया।
समाज के लिए संदेश
इस आयोजन ने समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि बच्चों में धार्मिक संस्कारों का बीजारोपण ही उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। परिवार और समाज मिलकर यदि प्रयास करें, तो नई पीढ़ी को धर्ममय और संस्कारित बनाया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि जैन समाज में बालक आठ वर्ष पूर्ण करने के बाद ही श्रीजी के अभिषेक के लिए पात्र होता है, आठ वर्ष से छोटे बच्चों को अभिषेक क्रिया के लिए पात्र नहीं माना जाता है ।
जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक एवं संस्कारपूर्ण आयोजन न केवल हमारी परंपराओं को सशक्त बनाते हैं, बल्कि बच्चों के भीतर नैतिकता, श्रद्धा और सदाचार के बीज भी रोपित करते हैं। निश्चित रूप से यह आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और उन्हें धर्म के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करेगा।
सिंघई परिवार द्वारा समाज के सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से इस पुण्य अवसर पर सहभागी बनने का आग्रह करते हुए ससम्मान आमंत्रित किया गया था। उपस्थित जनसमूह ने बालक को आशीर्वाद प्रदान करते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
गौरतलब है कि अव्यांश का यह प्रथम श्रीजी का अभिषेक महोत्सव केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में धर्म, संस्कार और आस्था का संचार करने वाला एक जीवंत उदाहरण बन गया है। ऐसे आयोजन समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। इस अवसर पर पवन अंकित सिंघई परिवार द्वारा ग्यारह हजार रूपए के दान कि घोषणा करते हुए उपस्थित सभी सदस्यों को विद्यासागर भवन में स्वल्पाहार करवाकर आयोजन में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया। आयोजन की समस्त धार्मिक क्रिया मनोज जैन पुजारी द्वारा संपन्न करवाई गई ।












