हरदा (सार्थक जैन) । देश भर के विभिन्न कर्मचारी संगठन की लंबित न्यायोचित मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ से जुड़े 18 से अधिक संगठनों ने राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाया । गत माह पुरी में आयोजित संगठन के 21 वें अखिल भारतीय अधिवेशन में लिए गए निर्णय के अनुसार बीएमएस की सभी इकाइयों नै जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र और राज्य सरकारों से श्रमिकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की। इस दौरान करीब 18 संगठनों से जुड़े कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 46 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन संयुक्त कलेक्टर सतीश राय को सौंपा।
बीएमएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य जितेन्द्र सिंह गुर्जर एवं नर्मदापुरम संभाग प्रभारी जितेन्द्र सोनी ने बताया कि संगठन की सभी इकाइयाँ जिला मुख्यालय पर आयोजित पर धरना-प्रदर्शन में शामिल हुई ओर केंद्र तथा राज्य सरकारों पर उद्योगों व क्षेत्रों के श्रमिकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए दबाव बनाया। भामसं के जिलाध्यक्ष मुकेश धामनदे ने बताया कि श्रमिक हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे समय-समय पर सरकार के सामने रखे गए, लेकिन अब तक अपेक्षित सकारात्मक और ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए संगठन के द्वारा लिए गये निर्णय अनुसार आज विरोध दिवस पर धरना-प्रदर्शन किया गया है ।
पैदल रैली निकाल कर कलेक्ट्रेट पहुंचे कर्मचारी
मजदूर संघ के सदस्य पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में राष्ट्रहित और मजदूर हित से जुड़ी कुल 46 मांगें शामिल की गईं। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित कर प्रोत्साहन राशि के स्थान पर नियमित मानदेय देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा उनके मानदेय में वृद्धि की मांग की गई। एनएचएम के संविदा कर्मियों की बीमा, स्थानांतरण और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने की मांग भी शामिल रही।
सहकारिता और अन्य मुद्दे भी उठाए
प्रदर्शनकारियों ने सहकारिता क्षेत्र में वेतनमान पुनरीक्षण की विसंगतियों के निराकरण, जिला सहकारी बैंकों में सहायक महाप्रबंधक पद सृजन तथा बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग रखी। इसके अलावा वर्ष 2001 से पूर्व के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और मृतक आश्रितों को नौकरी देने के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मजदूर और कर्मचारी महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षा के कारण संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं तथा आशा और आशा संगिनी कर्मचारियों को घोषित मानदेय का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है और उनके साथ उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।













