मुनिश्री १०८ निर्णय सागर महाराज के सान्निध्य में १४ जून से होगा नगर में जैन समाज का भव्य पंचकल्याणक महोत्सव
टिमरनी। आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनिश्री १०८ निर्णय सागर जी महाराज के सान्निध्य में नगर में अगले माह होने जा रहे जैन समाज के श्रीमद्जिनेन्द्र पंच कल्याण महामहोत्सव के लिए आज सौधर्म इंद्र, कुबेर, महायज्ञनायक सहित अन्य पात्रों का चयन मुनिश्री की उपस्थिति में बंडा से पधारे वाणी भूषण बाल ब्रह्मचारी विनय भैय्या जी एवं सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र के ब्रह्मचारी भैय्याजी की उपस्थिति में संपन्न हुआ ।
श्रीमद्जिनेन्द्र पंच कल्याण महोत्सव समिति के अध्यक्ष आलोक जैन ठाकुर साहब ने बताया कि स्थानीय नार्मदीय धर्मशाला में पात्र चयन का कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें भगवान जी के माताजी पिताजी का सौभाग्य संतोष श्रीमती आरती जैन टिमरनी, सौधर्म इंद्र का सौभाग्य नवनीत अर्चना जैन भादूगांव, कुबेर इंद्र का सौभाग्य चिमनलाल मीना जैन छिपानेर, महायज्ञनायक का सौभाग्य अर्पित जैन परम शुभम परिवार टिमरनी, राजा श्रेयांश का सौभाग्य अरविन्द जैन टिमरनी, राजा सोम का सौभाग्य संभव सुरेन्द्र जैन हरदा, भरत चक्रवर्ती का सौभाग्य कुमार गौरव जैन टिमरनी, बाहुबली महाराज का सौभाग्य गर्भित जैन टिमरनी, ध्वजारोहण का सौभाग्य सरगम जैन अमृतश्री परिवार हरदा, यज्ञनायक का सौभाग्य महेंद्र अजमेरा हरदा, ईशान इंद्र का सौभाग्य अशोक जैन पोखरनी, सानतकुमार इंद्र का सौभाग्य आलोक जैन टिमरनी, मंडप उद्धघाटन का सौभाग्य सुरेन्द्र कुमार जैन मालथोन वाले सागर को प्राप्त हुआ । उक्त पात्रों के साथ ही ५१ इंद्र इंद्राणी सहित, अष्ट कुमारीयां, छप्पन कुमारीयां, ३२ मुकुटबद्ध राजा पात्रों का भी चयन किया गया ।
जैन समाज के नगर में पहली बार होने जा रहे श्रीमद्जिनेन्द्र पंच कल्याण महामहोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। पात्र चयन कार्यक्रम में टिमरनी नगर के साथ ही हरदा, खातेगांव, बानापुरा, इटारसी, छिपानेर, भादूगांव सहित आसपास के सैकड़ों जैन धर्मावलम्बी उपस्थित हुए ।
उल्लेखनीय है कि टिमरनी नगर में 30 वर्षों से अधिक समय से 1008 श्री पार्श्वनाथ प्रभु का समवशरण एक भवन की तीसरी मंजिल पर विराजमान था। वर्ष 2021 में संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विधासागर जी महाराज के निर्देशानुसार मुनि श्री विशद सागर जी महाराज एवं मुनिश्री निराकुल सागर जी महाराज का मंगल प्रवास टिमरनी नगर में हुआ और एक ही दिन में पुराने सभी विवादों का निराकरण होकर मंदिरजी का नव निर्माण प्रारंभ हुआ। स्थानीय स्तर पर अत्यंत ही छोटी समाज होने के बाद भी समाज के नवयुवकों की इच्छा शक्ति के चलते आज नगर में भव्य गगनचुम्बी पाषाण का मंदिर बन कर तैयार हो गया है। 108 आचार्यश्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से पाठशाला प्रेरक 108 मुनिश्री निर्णयसागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचर्या वाणी भूषण बा.ब.विनय भैया जी बंडा के निर्देशन में आगामी 14 से 20 जून 2025 में नवनिर्मित मंदिर का भव्य पंचकल्याणक महोत्सव होने जा रहा है।













