भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस इकाईयों के प्रमुखों को नया फरमान जारी कर कहा है कि यह आवश्यक नहीं है कि धोखाधड़ी एवं गबन संबंधी प्रत्येक शिकायत पत्र की प्रारंभिक जांच की जाये, शिकायत पत्र में उल्लेखित तथ्य यदि प्रथमतः स्पष्ट एवं समाधानकारक हैं तो अपराध पंजीयन (एफआईआर) की कार्यवाही बिना प्रारंभिक जांच के भी तत्काल की जा सकती है जबकि इस हेतु पुलिस अधीक्षक/पुलिस आयुक्त अथवा उपायुक्त द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया जाये। इससे नीचे के पुलिस अधिकारी अब धोखाधड़ी एवं गबन के मामलों में एफआईआर दर्ज नहीं करवा पायेंगे।
यह नई व्यवस्था इसलिये की गई है ताकि अपुष्ट एवं असत्य आधार पर किसी शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सूचना पर निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक प्रताड़ना से बचाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने भी रिखब बीरानी विरुध्द उप्र शासन के मामले में 16 अप्रैल 2025 को इस संबंध में उक्ताशय का निर्णय दिया है।












