मध्य प्रदेश में रिश्वतखोरों के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई लगातार जारी है। लोकायुक्त के एक्शन के बाद भी रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। सरकारी दफ्तरों में आम जनता से काम के बदले रिश्वत मांगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सरकारी कार्यालयों में रिश्वत का खेल जारी है। ताजा मामला रीवा से सामने आया है, जहां एक किसान से नायब तहसीलदार के नाम पर रिश्वत (Bribe) की मांग की गई। लेकिन किसान ने चुप न रहकर रीवा लोकायुक्त (Riva Lokayukta) में शिकायत दर्ज कराई और फिर जो हुआ, उसने भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ा दी।
आरोपी नायब तहसीलदार के रीडर देवेंद्र साकेत ने शिकायतकर्ता चंद्रकांत पाण्डेय से जमीन के नक्शे को तरमीम कराने के लिए 2,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त संभाग रीवा में आवेदन दिया और सत्यापन कराया। सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार करने के लिए एक टीम गठित की।
रीवा में लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार के रीडर देवेंद्र साकेत को 2,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ट्रैप किया है। बता दें कि आरोपी देवेंद्र साकेत पर रामनई के रहने वाले चंद्रकांत पांडे से जमीन के नक्शे को तरमीम कराने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। सोमवार की दोपहर यह कार्रवाई नायब तहसीलदार के कक्ष में की गई।
नक्शा तरमीम करने के लिए मांगी रिश्वत
पकड़े गए देवेंद्र साकेत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर मामले को विवेचना में लिखा गया है। जानकारी देते हुए लोकायुक्त कार्यालय में पदस्थ यूपी पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने बताया कि उक्त रीडर द्वारा रिश्वत के तौर पर 2000 रुपए लिए जा रहे थे। यह रिश्वत जमीन का नक्शा तरमीम करने के लिए ली जा रही थी। कार्रवाई करने वाली टीम में प्रवीण सिंह परिहार, उप पुलिस अधीक्षक और संदीप सिंह भदौरिया, निरीक्षक शामिल रहे।












