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हरदा को इंदौर खंडपीठ से जोड़ने जबलपुर हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश को सौंपा ज्ञापन

हरदा । जिले को जबलपुर उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से हटाकर इंदौर खंडपीठ से जोड़ने हरदा प्रवास पर पधारें जबलपुर उच्च न्यायालय के प्रभारी एवं प्रशासनिक न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल को जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश टांक ने एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने हरदा सहित खंडवा, बुरहानपुर और सीहोर जिलों को जबलपुर उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से हटाकर इंदौर खंडपीठ से जोड़ने का पुरजोर आग्रह किया। श्री टांक ने दूरी और सुगमता को मुख्य आधार बनाया।

अधिवक्ता प्रकाश टांक ने न्यायमूर्ति अग्रवाल के साथ चर्चा करते हुए इस मांग के पीछे के तार्किक और व्यावहारिक कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हरदा से जबलपुर की दूरी लगभग 260 किमी है, जबकि इंदौर मात्र 150 किमी की दूरी पर स्थित है। इंदौर के लिए सड़क और रेल मार्ग के बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं, जिससे पक्षकारों और वकीलों को कम समय और कम खर्च में न्याय मिल सकेगा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि हरदा के साथ-साथ खंडवा, बुरहानपुर और सीहोर के लिए भी इंदौर पहुंचना जबलपुर की तुलना में कहीं अधिक सुगम है।

चर्चा के दौरान श्री टांक ने न्यायमूर्ति को अवगत कराया कि यह मांग लंबे समय से लंबित है और इस संबंध में पूर्व में भी शासन व न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर पत्राचार और आवश्यक कार्यवाहियां की जा चुकी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि न्याय की सुलभता का सिद्धांत तभी चरितार्थ होगा जब वह जनता की पहुंच के भीतर हो। माननीय न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल ने अधिवक्ता टांक द्वारा प्रस्तुत किए गए नक्शों और तर्कों को गंभीरता से देखा और समस्या पर संज्ञान लिया। उन्होंने इस विषय में ज्ञापन पर विचार करने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर स्थानीय बार एसोसिएशन के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित रहे। अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि हरदा को इंदौर खंडपीठ से जोड़ दिया जाता है, तो इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि कानूनी प्रक्रियाओं में आम नागरिक की सहभागिता और सुलभता भी बढ़ेगी।

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