हरदा। गणगौर उत्सव के आयोजन को लेकर जिले सहित गांवों में उत्साह है। प्रतिदिन आसपास सहित दूरदराज की भजन मंडलियों द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी जा रही है। महिलाएं दिन में खेतों में पेड़ों के नीचे पाती खेल रही हैं। गणगौर गीतों व भजनों के माध्यम से गणगौर की आराधना की जा रही है। हरदा जिले के अनेकों ग्रामों में गणगौर उत्सव में महिलाएं भी अपनी प्रस्तुति दे रही है। बड़ी संख्या में गांव की महिलाएं एकत्र होकर और आम के पेड़ के नीचे झालरे माता के जस भजन के माध्यम से अपनी प्रस्तुति देती है।
नौ दिवसीय गणगौर महोत्सव की धूम मची हुई है। गणगौर महोत्सव में प्रतिदिन 8 से 10 मंडलियां प्रस्तुति दे रही है। गुरुवार रात्रि को कलाकारो द्वारा शानदार नृत्य की प्रस्तुति दी जाती है जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। दोपहर में महिलाओं द्वारा पाती खेली जाती। महिला मंडलियों द्वारा हास्य नाटिकाएं प्रस्तुत किए गए। मातारानी के भजन गाए जाते है।
मंडलों ने प्रस्तुत किए भजन
गणगौर उत्सव के आठवे दिन भी गणगौर भजन मंडलियों द्वारा माता रानी के भजन गाए गए। जिले के नामचीन मंडलो ने भजनों की शानदार प्रस्तुति दी। गौर पतेला आयोजक परिवार और उनके सगे संबंधी रिश्तेदारों द्वारा आमंत्रित मंडलों का तिलक एवं फूलों से स्वागत कर मंडलों की प्रस्तुति पर पुरस्कार के रूप में मंडलों को दर्शकों और आयोजक परिवार द्वारा राशि दी जाती है जिससे उनका मनोबल बढ़े ।
जिले के दर्जनों ग्रामों में नव दिवसीय गणगौर उत्सव का आयोजन चल रहा है। ग्राम की महिलाएं पुरुषों द्वारा झालरे दिए गए, वहीं गांव के आयोजक परिवार द्वारा दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया जाता है। मंडलों का तिलक लगाकर स्वागत किया जाता है गणगौर मंडल द्वारा गणपति वंदना के बाद माताजी के भजन,,मैया तेरे अंगना में बाजे शहनाई,, । ,,आसी चुनर ओड़ी न हओ जाऊ रे पिया असि रंगो म्हारी या चुनरी। मंडल के कलाकारों द्वारा सुंदर स्वाँग प्रस्तुत किए जाते है गणगौर मंडल द्वारा सुंदर भजन गाते है। परिवार द्वारा आयोजित गणगौर महोत्सव में मंडल द्वारा भजनों और झालरे की प्रस्तुतियां दी जाती है। सर्वप्रथम गणगौर मंडल द्वारा गणेश वंदना गाकर कार्यक्रम प्रारंभ किया जाता है मंडलो द्वारा शानदार भजनों की प्रस्तुतियां दीं जाती ।













