इंदौर । राज्य शासन ने जिला अलीराजपुर का नाम परिवर्तित कर आलीराजपुर करने की अधिसूचना जारी की है। राजस्व विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार जिला अलीराजपुर का नाम अब “आलीराजपुर” होगा। यह निर्णय भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 21 अगस्त 2025 को जारी अनापत्ति पत्र के आधार पर लिया गया है। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू होगी।
जिले के कलेक्टर अभय बेड़ेकर ने बताया कि स्थानीय लोगों की मांग पर प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें कारण भी बताया गया। सरकार ने कारण को सही मानते हुए भारत सरकार को एनओसी के लिए प्रस्ताव आगे भेजा, जिस पर केंद्र की तरफ से एनओसी मिल गई है। प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने जिले के नाम आलीराजपुर होने संबंधी नोटिफिकेशन जारी करने प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। एक-दो दिन में अधिसूचना जारी हो जाएगी।
राठौड़ शासकों का भी प्रभाव रहा
जिले के नाम की पुरानी वर्तनी “अलीराजपुर” लंबे समय से विवाद और चर्चा का विषय रही थी। इसको बदलने के लिए स्थानीय लोग मांग रहे थे। इतिहासकारों के अनुसार यहां पर अली और राजपुर नाम से दो गांव हैं। ये दोनों गांव 400 साल पहले छोटी छोटी रियासतें थीं। ऐसा माना जाता है कि 15 वीं सदी में यहां भील राजा आलिया भील का शासन रहा। आलिया भील के नाम पर ही इस इलाके की पहचान बनी। वहीं, यहां पर बाद में राठौड़ शासकों का भी प्रभाव रहा और यह क्षेत्र राठौड़ राजाओं का गढ़ कहलाया। ऐसा कहा जाता है कि दोनों शासकों के प्रभाव से ये दो रियासतें बनी थीं, जिनके नाम पर अब दो गांव रह गए। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इन दोनों रियासतों को एक मिलाकर आलीराजपुर कहा जाता था। समय के साथ उच्चारण और वर्तनी में बदलाव आया और यह अलीराजपुर कहलाने लगा। स्थानीय समाज लंबे समय से इसकी मूल पहचान और उच्चारण “आलीराजपुर” को ही आधिकारिक मान्यता देने की मांग कर रहा था।
2008 में बना अलीराजपुर जिला
अलीराजपुर जिला 17 मई 2008 को अस्तित्व में आया था। इसे झाबुआ जिले से अलग कर नया जिला बनाया गया और इसका नाम तत्कालीन मुख्यालय अलीराजपुर पर रखा गया। अब सरकार ने स्थानीय भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इसका नाम ‘आलीराजपुर’ कर दिया है। नोटिफिकेशन जारी होने के बाद सभी शासकीय पत्राचार और आधिकारिक अभिलेखों में जिले का नाम नई वर्तनी के साथ दर्ज होगा।












