भगवान की भक्ति में जो निरंतर लीन रहता है, पूतना (अविद्या) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती : संत कमलेश मुरारी

भगवान की भक्ति में जो निरंतर लीन रहता है, पूतना (अविद्या) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती : संत कमलेश मुरारी

ग्राम डोमनमऊ में जारी है भगवत कथा, पहुंच रहे श्रृद्धालु

लोकमतचक्र.कॉम।

डोमनमऊ : भगवान की भक्ति में जो निरंतर लीन रहता है, पूतना (अविद्या) उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती । उक्त उद्गार ग्राम डोमनमऊ में आयोजित श्रीमद भागवत् कथा के पांचवे  दिन की कथा मे संत कमलेश मुरारी ने बताते हुए व्यक्त किए। संत श्री मुरारी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया की  अज्ञान रूपी पूतना ने 700 दुध मुहे शिशुओ की हत्या की थी। उसके प्राण हर लिए थे इसके बाद भी भगवान ने उसका उद्धार कर दिया।

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आगे बताते हुए कहा कि शरीर को लंका बना लो तो वह रावण और अयोध्या और बना लो तो राम बन जाता है। ओर शरीर को मथुरा बना लो तो कंस और गोकुल बना लो तो कृष्ण बन जाता है ये मनुष्य की सोच पर निर्भर करता है। कि हमें क्या बनना है। हर चीज एक निश्चित समय पर वोली जाना चाहिए जैसे हंसी एवं गाली समय समय पर उचित रहती है, गैर समय हंसी और गाली विवाद की जड़ बनती है। जैसे कि राम विवाह के समय जनकपुर की महिलाओं ने भगवान के परिवार को तीन पीढ़ियों तक गाली दी, जो कि आनंदित थी। वही द्रोपदी  असमय दुर्योधन पर हंसी तो वह महाभारत जैसे युद्ध में परिवर्तित हुई । हंसना रोज चाहिए और रोज रोना भी चाहिए,भगवान की याद में हंसने से आंख खुलती है ओर रोने से आँखे धुलती है। कालीराणा परिवार के द्वारा आयोजित कथा में दूर दूर से बढी संख्या में श्रद्धालु पधारकर कथा का अमृत पान कर रहें हैं।

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