हरदा नगर में जैन आर्यिका साध्वियों के चतुर्मास कलश स्थापना का भव्य समारोह संपन्न

हरदा नगर में जैन आर्यिका साध्वियों के चतुर्मास कलश स्थापना का भव्य समारोह संपन्न

3 बड़े कलश ओर 41लघु कलशों की हुई स्थापना, नगर के जैन धर्मावलम्बी चार माह तक लेंगे धर्म लाभ

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लोकमतचक्र.कॉम

हरदा : नगर में दिगम्बर जैन समाज की दो आर्यिका माताजीओं का चतुर्मास होने जा रहा है, जिसके लिए चतुर्मास कलश स्थापना का आयोजन समारोह पूर्वक आचार्य श्री विद्यासागर भवन में संपन्न हुआ। हरदा नगर की दिगम्बर जैन समाज को काफी अरसे के बाद जैन आर्यिका जी के सानिध्य का लाभ लंबे समय तक मिलेगा।

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उक्त जानकारी देते हुए जैन समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान की कृपा से एवं संत शिरोमणी आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से बुंदेलखण्ड केसरी आचार्य सिद्धांत सागर जी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या परम विदुषी अखण्ड मौन साधिका आर्यिका रत्न 105 सरसमति माताजी एवं आर्यिका 105 सुबोधमति माताजी का वर्ष 2022 का पावन वर्षायोग कराने का सौभाग्य हरदा दिगम्बर जैन समाज को प्राप्त हुआ है। जिसका चतुर्मास मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य पं. श्री नन्हे भैया जी शास्त्री सागर एवं वाणीभूषण बाल ब्रम्हचारी सुमित भैया जी, अनिल भैया जी भोपाल के सानिध्य में समारोहपूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर ध्वजारोहण, मंगलाचरण, चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन आचार्य श्री का पूजन, शास्त्र भेंट, वस्त्र भेंट माता जी के मंगल प्रवचन एवं मंगल कलश स्थापना की गई। 

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जिसमें ध्वजारोहण का  सौभाग्य अनूप बजाज परिवार को प्राप्त हुआ पश्चात मंगलाचरण पाठ रति बजाज, नीता सिंघई, नृत्य पूर्णि बजाज ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री का चित्र अनावरण सुरेंद्र जैन परिवार, दीप प्रज्वलन का सौभाग्य रविंद्र रपरिया परिवार, शास्त्र भेंट का सौभाग्य अभिषेक अजीत रपरिया, विमल जैन मंडीदीप, वस्त्रदान का सौभाग्य श्रीमती निर्मला कैलाश पाटौदि इंदौर एवं श्रीमती वैशाली गौतम कठनेरा  परिवार को प्राप्त हुआ। आयोजन के महत्वपूर्ण अवसर कलश स्थापना का सौभाग्य प्रथम कलश के रूप में श्री पवन अंकित सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ,  द्वितीय कलश का सौभाग्य श्रीमती उषा अशोक बड़जात्या परिवार एवं तृतीय कलश का सौभाग्य श्रीमती आरती अभिषेक  रपरिया  परिवार को प्राप्त हुआ । इसके साथ ही 41 लघु कलशों से स्थापना का सौभाग्य समाज के अन्य भाग्यशाली परिवारों द्वारा प्राप्त किया गया।

इस अवसर पर आर्यिका १०५ सुबोधमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहाकि आपका जीवन अस्त-व्यस्त है, क्योंकि आपका अपने जीवन के प्रति शुभ भाव नहीं हैं। जिन्होंने स्वभाव की प्राप्ति कर ली वह वंदनीय हैं। जैसे जैसे गुणों का वर्धन होता है पूज्यता बढ़ती जाती है। हमारे यहां परमात्मा, परमात्मा नहीं बनते, बल्कि भक्त ही परमात्मा बनते हैं। इस दृष्टि से प्रत्येक जीवात्मा परमात्मा है सभी का कर्तव्य है कि परिस्थिति अनुकूल ना होने पर भी धैर्य और सभी जीवों के प्रति समता भाव रखें। राग द्वेष को कम करें। हमें यह चिंतन करना चाहिए कि स्वभाव मेरी संपत्ति है और कर्मों ने उस पर कब्जा कर रखा है हमें कर्मों से अपनी संपत्ति छुड़ाना है। आर्यिकाजी ने कहा कि जिस आदमी को सोने के लिए नींद की गोली लेनी पड़े और जागने के लिए घड़ी या मोबाइल में अलार्म लगाना पड़े। उससे दुखी और परेशान आदमी कोई और नहीं हो सकता। दिनचर्या और व्यवहार को ठीक किया जाए। आर्यिका जी ने कहा कि सच्चा भक्त दुनिया की परवाह नहीं करता। दुनिया क्या बोलती है, क्या सोचती है और क्या करती है इसकी उसे कोई परवाह नहीं होती है। वह तो परमात्मा से कहता है कि हे प्रभु जिसमें तेरी रजा, उसमें मेरा मजा।

समारोह के पश्चात सामूहिक वात्सल्य भोज का आयोजन जैन मांगलिक भवन में किया गया। इस अवसर पर नगर की जैन समाज के साथ ही आसपास की जैन समाज के लोग काफी संख्या में उपस्थित थे।

क्यों होती है चतुर्मास कलश की स्थापना –

दिगंबर जैन संत ओर आर्यिका माताजी 12 महीने से आठ महीने पर विहार (पैदलगमन) करते हैं और बरसात के समय एक स्थान पर रुक जाते हैं। वह समय होता है चार महीने का। इसलिए उसे चौमासा या चतुर्मास कहते हैं। बारिश के समय जीवों की उत्पत्ति होती है। साथ ही हरियाली होती है। जैन संत जीवों की हिंसा न हो इस लिए एक जगह अपनी साधना करते हैं। इसके साथ ही जैन संत बारिश के दौरान बाहर का सफर नहीं करते हैं।

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