हरदा । आगामी 20 अप्रैल को ‘‘अक्षय तृतीया’’ के अवसर पर संभावित बड़ी संख्या में होने वाले विवाह समारोहों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन हरदा ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए व्यापक पहल शुरू की है। प्रशासन द्वारा विवाह से जुड़ी सभी सेवाएं देने वाले व्यक्तियों और संस्थानों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
जिला प्रशासन ने पंडितों, धर्मगुरुओं, होटल संचालकों, केटरर्स, टेंट हाउस, बैंड-बाजा संचालकों, ब्यूटी पार्लर, घोड़ी-बग्गी संचालकों, मैरिज गार्डन मालिकों, फोटोग्राफर्स एवं अन्य आयोजकों से आग्रह किया है कि वे विवाह से पूर्व वर-वधू की आयु का अनिवार्य रूप से सत्यापन करें।
प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुराग दुबे ने जानकारी देते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका एवं 21 वर्ष से कम आयु के बालक का विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत अपराध है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन प्रतिबंधित है, बल्कि इससे बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करें और कहीं भी इस प्रकार की घटना की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर किशोर न्याय अधिनियम 2015 एवं बाल संरक्षण अधिनियम 2016 के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, प्रधानाध्यापक या नजदीकी थाना में शिकायत की जा सकती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर की बाल संरक्षण समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, विद्यालय प्रधानाध्यापक, स्वास्थ्य कर्मी या थाना प्रभारी को सूचना दी जा सकती है।
इसके अलावा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष/सदस्य, जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय (प्रथम तल, कक्ष क्रमांक 61) तथा टिमरनी, खिरकिया और हरदा के शहरी एवं ग्रामीण परियोजना कार्यालयों में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह रोकना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।













