हरदा। विश्व णमोकार महामंत्र दिवस के अवसर पर संसार में शांति और सभी प्राणियों के कल्याण की भावना के साथ नगर के चारों जिनालयों में श्रावकों द्वारा णमोकार महामंत्र का सामूहिक पाठ किया गया।
जैन समाज के कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) के आह्वान पर यह दिवस मनाया गया। इसके अंतर्गत नगर के सभी जैन मंदिरों में एक साथ, एक समय पर णमोकार महामंत्र का जाप किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वभर में अहिंसा और शांति का संदेश फैलाना है।
उन्होंने बताया कि णमोकार महामंत्र को जैन धर्म का सबसे पवित्र और सार्वभौमिक मंत्र माना जाता है। इसे मंत्रों का रत्न भी कहा जाता है, क्योंकि यह किसी एक देव, गुरु या व्यक्ति की नहीं, बल्कि अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु जैसे श्रेष्ठ गुणों की वंदना करता है। मान्यता है कि इसी मंत्र से चौरासी लाख मंत्रों की उत्पत्ति हुई है।
यह महामंत्र आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसके जाप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा तनाव और अशांति दूर होती है।
*साधना के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव*
जैन समाज के सहसचिव संजय जैन ने बताया कि गुरुवार सुबह 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 36 मिनट तक नगर के सभी जिनालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का निरंतर जाप किया और ध्यान-साधना के माध्यम से आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।
महिला परिषद की सदस्य ज्योति कटनेरा ने कहा कि णमोकार महामंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि सामूहिक जाप से समाज में एकता, भाईचारा और सद्भाव को बढ़ावा मिलता है, जो वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसी वैश्विक संदेश के साथ गुरुवार को विश्व णमोकार महामंत्र दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया।













