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गेहूं खरीदी में देरी से किसानों को नुकसान, आम किसान यूनियन ने सरकार को घेरा

हरदा। प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आम किसान यूनियन ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। यूनियन के प्रतिनिधि बसंत सारन ने बताया कि शासन द्वारा गेहूं खरीदी की तिथियां बार-बार बदली जा रही हैं, जिससे किसानों को अपनी तत्काल जरूरतों के चलते गेहूं 2200 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचना पड़ रहा है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 350 रुपये का नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार वारदान की कमी का हवाला दे रही है, जबकि गेहूं खरीदी हर वर्ष की नियमित प्रक्रिया है और इसके लिए पूर्व से पर्याप्त तैयारी की जानी चाहिए थी। खरीदी में देरी के कारण किसान बैंक एवं सहकारी समितियों के कर्ज का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, जिससे वे बकायादार घोषित हो रहे हैं। इसके अलावा, बिजली बिल जमा न होने के कारण कई किसानों के कृषि पंपों के कनेक्शन भी काटे जा रहे हैं, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं।

आम किसान यूनियन ने सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार केवल किसान हितैषी होने का दावा करती है, जबकि जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।

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