हरदा । जिले में सैटेलाइट निगरानी और प्रशासन की सख्त कार्रवाई के बावजूद किसानों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने को लेकर अपेक्षित जागरूकता नहीं दिख रही है। प्रतिदिन जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से नरवाई जलाने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है।
प्रशासन द्वारा लगातार निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें सैटेलाइट के माध्यम से खेतों में लगने वाली आग की पहचान कर तत्काल संबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद कई किसान नियमों की अनदेखी कर फसल अवशेष जला रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नरवाई जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इसके साथ ही आसपास के क्षेत्रों में आग फैलने का खतरा भी बना रहता है। प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने सहित वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई जलाने के बजाय वैकल्पिक उपाय अपनाएं। कृषि विभाग द्वारा अवशेष प्रबंधन के लिए विभिन्न योजनाओं और उपकरणों की जानकारी भी किसानों को दी जा रही है, ताकि वे पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाएं।
इसके बावजूद लगातार सामने आ रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अभी भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने नरवाई जलाने पर प्रतिबंध आदेश जारी किया हुआ है ओर प्रतिदिन किसानों पर एफ आई आर दर्ज कर जुर्माना अर्थदंड कि कार्यवाही की जा रही है । वावजूद इसके किसानों में प्रशासनिक कार्यवाही का कोई खौफ नहीं है ।













