हरदा। किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार भावांतर योजना का संचालन कर रही है। किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
भावांतर योजना के अंतर्गत किसान अपनी उपज मंडी में बेच सकते हैं। यदि सोयाबीन का विक्रय मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी से कम प्राप्त होता है, तो सरकार किसानों को मंडी मॉडल रेट और एमएसपी के बीच का अंतर भावांतर राशि के रूप में 15 दिनों के भीतर सीधे उनके आधार लिंक बैंक खातों में प्रदान करेगी।
सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी रूपए 5328 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। मंडी मॉडल रेट मंडियों में विक्रय की गई उपज का औसत मूल्य होता है, जिसके आधार पर भावांतर राशि तय की जाती है।
किसान भाई इस योजना का लाभ लेने के लिए सोसायटी स्तर पर स्थापित पंजीयन केंद्र, ग्राहक सेवा केंद्र, एमपीऑनलाइन कियोस्क अथवा “एमपी किसान ऐप” पर अपना पंजीयन करा सकते हैं।
कृषि उपज मंडियों में बनाई जाएगी हेल्प डेस्क – कलेक्टर
कलेक्टर सिध्दार्थ जैन ने बुधवार को जिले के राजस्व एवं कृषि अधिकारियों की वीडियो कान्फ्रेंस के लेकर कहा कि किसानों को भावांतर योजना के बारे में विस्तार से समझाया जाए। उनको बताया जाए कि भावांतर योजना से सोयाबीन बेचने में कोई नुकसान नहीं है। कलेक्टर ने कहा किसानों को योजना की जानकारी देने जिले की प्रत्येक कृषि उपज मंडी में हेल्प डेस्क भी बनाई जाए। इस दौरान कलेक्टर ने फसल कटाई प्रयोग के कार्य भी शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
अनाज व्यापारियों की बैठक लेकर योजना पर चर्चा की
कलेक्टर ने बुधवार को जिले के अनाज व्यापारियों की बैठक लेकर उनको योजना की बिन्दुवार जानकारी दी। साथ ही कहा कि उनके पास आने वाले किसानों को योजना के लाभों से अवगत कराएं। ताकि किसानों को योजना के बारे में भ्रम की स्थिति न रहे। इस दौरान उन्होंने व्यापारियों की समस्याएं भी सुनी।
किसान समृद्धि का नया अध्याय
✅भावांतर योजना से किसानों को मिलेगा उचित मूल्य
✅पंजीयन प्रारंभ – 𝟑 अक्टूबर से 𝟏𝟕 अक्टूबर 𝟐𝟎𝟐𝟓 तक
✅योजना प्रभावशील – 𝟐𝟒 अक्टूबर 𝟐𝟎𝟐𝟓 से 𝟏𝟓 जनवरी 𝟐𝟎𝟐𝟔 तक












