हरदा। दिगम्बर जैन समाज में समाधि मरण के आध्यात्मिक महत्व, विधि-विधान और शास्त्रीय प्रक्रिया को समझाने के उद्देश्य से आज दिनांक 11 अप्रैल को श्री शांतिनाथ चैत्यालय में एक दिवसीय समाधि मरण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का संचालन जैन समाज के विद्वान पंडित समर्थ जैन द्वारा किया गया।
तीन सत्रों में दी गई विस्तृत जानकारी
शिविर को तीन अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया, जिसमें विषय के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई—
सुबह 8:30 से 9:30 बजे
विषय: समाधि का स्वरूप (क्षपक) — यह सत्र विशेष रूप से उन साधकों के लिए था, जो समाधि मरण का अभ्यास और समझ विकसित करना चाहते हैं।
दोपहर 3:30 से 4:30 बजे
विषय: निर्यापक प्रशिक्षण — इस सत्र में उन लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जो समाधि मरण की प्रक्रिया में सहयोग करते हैं।
शाम 7:15 से 8:15 बजे
विषय: प्रश्नोत्तर एवं जीवन उपयोगी चर्चा — इसमें उपस्थित जनों के प्रश्नों का समाधान किया गया और विषय से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।
समाधि मरण की प्रक्रिया पर विशेष जोर
शिविर में बताया गया कि आज के समय में कई लोग समाधि मरण लेना तो चाहते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक प्रक्रिया और स्वरूप से अनभिज्ञ हैं। ऐसे में इस प्रकार के शिविर लोगों को सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। श्री जैन ने स्पष्ट किया कि इस शिविर में न केवल संभावित साधकों को समाधि मरण का महत्व समझाया गया, बल्कि परिवार के अन्य सदस्यों—जैसे बहु, बेटे और बेटियों—को भी यह सिखाया गया कि समाधि मरण की प्रक्रिया कैसे कराई जाती है।
पंडित समर्थ जैन ने समाज के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि वे इस आध्यात्मिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों और अन्य साधर्मियों को भी इससे जोड़ें। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण और अनंत भवों के दुखों से मुक्ति का मार्ग बताया गया। उल्लेखनीय है कि यह शिविर दिगम्बर जैन समाज में समाधि मरण की परंपरा को समझने और उसे सही तरीके से अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।













