CM शिवराज को राखी बांधने पहुंची चयनित महिला शिक्षकों के खिलाफ FIR, बलवा सहित कई धाराओं के तहत अपराध दर्ज

CM शिवराज को राखी बांधने पहुंची चयनित महिला शिक्षकों के खिलाफ FIR, बलवा सहित कई धाराओं के तहत अपराध दर्ज

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बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था… 

भोपाल। चयन के बाद ज्वाइनिंग का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों ने बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय प्रदर्शन किया और संगठन के जरिये ज्वाइनिंग की मांग की। इस दौरान कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी और कुणाल चौधरी भी वहां पहुंचे और कहा कि वे राजनीति करने नहीं आये हैं। दूसरी ओर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों ने भी इस मामले में राजनीति न करने का आग्रह कर विधायकों को लौटा दिया। महिला शिक्षकों की संख्या प्रदर्शन में ज्यादा थी। थाली में राखी लेकर पहुंची चयनित महिला शिक्षकों में से कुछ ने रोते हुए जल्द ज्वाइन कराने की मांग रखी तो कुछ कार्यालय के बाहर साष्टांग भी लेटी रहीं। उधर देर शाम बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले 27 चयनित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की सूचना है।
बुधवार को बगैर सूचना अनुमति के भाजपा कार्यालय के समक्ष अपनी पदस्थापना को लेकर उग्र प्रदर्शन के मामले में हबीबगंज पुलिस ने 27 चयनित शिक्षकों के खिलाफ बलवा समेत अन्य धाराओं के तहत नामजद प्रकरण दर्ज कर लिया। मालूम हो कि बुधवार दोपहर अपनी पदस्थापना समेत अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ हजार चयनित महिला पुरुष शिक्षकों ने बगैर अनुमति के उग्र प्रदर्शन किया था।

बीजेपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करना चयनित शिक्षकों को भारी पड़ गया। पुलिस ने 27 चयनित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने चयनित शिक्षकों के खिलाफ बलवा समेत अन्य धाराओं के तहत नामजद अपराध दर्ज किया है।चयनित महिला शिक्षक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को राखी बांधकर उनसे तोहफे के रुप में अपनी लंबित नियुक्ति की मांग करने पहुंची थी। दिनभर चले प्रदर्शन के बाद देर रात 27 चयनित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया।

कब क्या हुआ…?

सितंबर साल 2018 की तत्कालीन शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन किया था। इससे पहले की परीक्षा के नतीजे आते, विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बन गई और नतीजों पर तलवार लटक गई। इसके बाद चयनित शिक्षकों के संघर्ष और प्रदर्शन के बाद आखिरकार 2019 में परीक्षा के नतीजे घोषित हुए लेकिन फिर नियुक्ति पर पेंच फंस गया।इस बीच मध्यप्रदेश में घटे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कोरोना का संकट आड़े आ गया और नियुक्तियों पर फिर संदेह के बादल मंडराने लगे। हालांकि काफी जद्दोजहद के बाद जुलाई 2020 में नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी और चयनित शिक्षकों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन शुरू हुआ लेकिन महज़ तीन दिन बाद ही इसे भी रोक दिया गया।चयनित शिक्षकों का आरोप है कि उस समय कोरोना की वजह से सार्वजनिक परिवहन पर रोक की वजह बताई गई। अब 2021 में वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी हो गई है लेकिन अब तक चयनित शिक्षकों को जॉइनिंग नहीं मिली है।

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