मध्य प्रदेश में ई- स्टाम्प पेपर की बिक्री के लिए नए नियम लागू होने से अब दोनों पक्षों के आधार कार्ड व ओटीपी वेलिडेशन जरूरी कर दिया है। इस कारण रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेजों से संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं। एफिडेविट, इंडेम्निटी बॉन्ड, शेयर ट्रांसफर आदि जैसे कार्यों के लिए स्टाम्प पेपर खरीदने में लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इसमें दूसरे पक्ष का भी ओटीपी लग रहा है, जो कई मामलों में शेयर कंपनियां, सरकारी विभाग आदि हैं।
व्यापारियों ने इस मुद्दे को प्रदेश सरकार के सामने भी रखा है और नियमों में शिथिलता देने की मांग की है। जल्द इस मामले में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से भी मुलाकात कर उन्हें इस मुद्दे के बारे में बताएंगे। इस नए प्रावधान की वजह से सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है। 2 महीने पहले तक सिर्फ दूसरी पार्टी का नाम लिखवाकर स्टाम्प मिल सकता था, लेकिन अब नए नियम के बाद से बहुत परेशानी हो रही है।
स्टाम्प वेंडरों का कहना है कि यह नियम सिर्फ मप्र में ही लागू है, किसी अन्य प्रदेश में नहीं। राजस्थान में सिर्फ दूसरी पार्टी का नाम बताने से स्टाम्प इश्यू हो जाता है। पहली पार्टी की पहचान के रूप में आधार कार्ड लगता है, जिसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन दूसरी पार्टी के आधार कार्ड की मांग करने पर अकसर परेशानी आती है।












