wheat farming and variety for un irrigated land

अब हो सकेगा गेहूं उत्पादों का निर्यात, सरकार ने तीन साल बाद एक्सपोर्ट पर लगा प्रतिबंध हटाया

केंद्र सरकार ने गेहूं और इसके उत्पादों के निर्यात को मंजूरी देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सरकार ने चीनी के निर्यात की भी इजाजत दी है। सरकार ने यह निर्णय घरेलू बाजारों को स्थिर करने और उत्पादकों को अच्छी कीमत दिलाने के लिए लिया है।

केंद्र सरकार ने लंबे समय बाद गेहूं निर्यात को खोल दिया है। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दी है। इसके साथ ही अब गेहूं उत्पादों का भी निर्यात हो सकेगा। सरकार ने 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। सरकार का कहना है कि यह सोच-समझकर मौजूदा उपलब्धता और कीमत की स्थिति का पूरी तरह से आकलन करने के बाद लिया गया फैसला है, जिससे किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।

सरकार ने गेहूं निर्यात की मंजूरी के पीछे तर्क

सरकार ने गेहूं और इसके उत्पादों के निर्यात को मंजूरी के पीछे कुछ तर्क दिए हैं। सरकार का कहना है 2025-26 के दौरान निजी कंपनियों के पास गेहूं का स्टॉक लगभग 75 लाख होगा, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में लगभग 32 लाख टन से ज्यादा है। साल-दर-साल यह बड़ी बढ़ोतरी देश में सप्लाई की अच्छी स्थिति दिखाती है। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 तक एफसीआई के पास केंद्रीय पूल में कुल गेहूं की उपलब्धता लगभग 182 लाख टन होने का अनुमान है, जिससे यह पक्का होता है कि निर्यात की इजाजत से घरेलू खाद्य सुरक्षा की ज़रूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से भी निर्यात खोलने को मिला बल

रबी 2026 में गेहूं का रकबा भी पिछले साल के 328.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है। यह गेहूं की खेती में किसानों के मजबूत भरोसे को दिखाता है, जिसे MSP और खरीद के तरीकों से समर्थन मिलता है। साथ ही यह एक और अच्छी फसल की संभावना का संकेत देता है। ज्यादा स्टॉक की उपलब्धता, कीमतों में नरमी, ज़्यादा उत्पादन की उम्मीद और पीक आवक के दौरान मजबूरी में बिक्री को रोकने की जरूरत को देखते हुए 25 लाख गेहूं और 5 लाख गेहूं उत्पादों के निर्यात की इजाजत देने के सरकार के फैसले से घरेलू कीमतों को स्थिर करने, बाजार में तरलता सुधारने, स्टॉक रोटेशन को बेहतर बनाने और किसानों की आय को और मजबूत करने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा में मदद मिलेगी।

चीनी निर्यात को भी सरकार ने मंजूरी

केंद्र सरकार ने गेहूं के साथ ही चीनी निर्यात को भी आसान बनाने के लिए मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी निर्यात करने की इजाजत देने का फैसला किया है। इससे पहले सरकार ने 14 नवंबर 2025 के ऑर्डर के जरिए मौजूदा चीनी सत्र 2025–26 के दौरान 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। चीनी मिलों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक सिर्फ लगभग 1.97 लाख टन चीनी निर्यात की गई है। इसके अलावा आज तक चीनी मिलों ने लगभग 2.72 चीनी निर्यात के लिए सौदे किए हैं।

5 लाख टन अतिरिक्त निर्यात की मात्रा उन चीनी मिलों को दी जाएगी जो तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि उन्हें तय मात्रा का कम से कम 70 फीसदी 30 जून 2026 तक निर्यात करना होगा। निर्यात कोटा तैयार चीनी मिलों के बीच प्रो-राटा बेसिस (pro-rata basis)पर दिया जाएगा और मिलों को ऑर्डर जारी होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर अपनी मर्जी बतानी होगी। इस तरह से दिया गया निर्यात कोटा किसी दूसरी चीनी मिल के साथ बदला नहीं जाएगा। इस फैसले से चीनी का ज्यादा निर्यात होने और देश में सरप्लस चीनी की उपलब्धता को मैनेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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