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मोरंड-गंजाल परियोजना पर ‘क्रेडिट वॉर’ तेज, विकास से ज्यादा सियासत गरमाई

हरदा । मोरंड-गंजाल सिंचाई परियोजना को केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही हरदा जिले में विकास से ज्यादा सियासत चर्चा के केंद्र में आ गई है। परियोजना के श्रेय को लेकर पूर्व मंत्री कमल पटेल और विधायक डॉ. आरके दोगने आमने-सामने आ गए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

पूर्व मंत्री कमल पटेल ने प्रेसवार्ता में दावा किया कि परियोजना का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा और इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना से जिले के कई गांवों की करीब 40 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। पटेल ने अपने कार्यकाल के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मंडी निधि से कई सड़कों का निर्माण कराया, जो पहले कभी नहीं हुआ। साथ ही उन्होंने विधायक दोगने को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें क्षमता है तो वे भी कोई घोषणा कर उसे पूरा करके दिखाएं।

दूसरी ओर, विधायक डॉ. आरके दोगने ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यह परियोजना कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत हुई थी और इसके लिए उन्होंने विधानसभा में लगातार आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि कमल पटेल केवल श्रेय लेने की राजनीति कर रहे हैं, जबकि उन्हें जनता की सेवा पर ध्यान देना चाहिए। दोगने ने यह भी कहा कि पटेल के कृषि मंत्री रहते हुए कोई विशेष विकास कार्य नहीं हुए।

दोगने के मुताबिक करीब 3500 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से हरदा, नर्मदापुरम और खंडवा जिलों के 201 गांवों की 64 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित होगी और इसके लिए वर्ष 2020 में अनुबंध भी किया जा चुका है।

हालांकि परियोजना की स्वीकृति से किसानों में उम्मीद की नई किरण जगी है, लेकिन नेताओं के बीच श्रेय की इस सियासी जंग ने विकास के मुद्दे को राजनीतिक बयानबाजी में बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि यह परियोजना जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी उतरती है और किसानों को इसका वास्तविक लाभ कब तक मिल पाता है।

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