जब एक शिक्षक जो ईमानदारी का पाठ पढ़ाता हो ओर मौका मिलने पर भ्रष्टाचार में खुद लिप्त हो जाये तो बच्चों को क्या शिक्षा हासिल होगी समझा जा सकता है । मध्यप्रदेश में पुलिस, राजस्व, पंचायत जैसे विभागों पर भ्रष्टाचार का तमगा लगा हुआ है पर अब भ्रष्ट रिश्वतखोर शिक्षकों के कारण शिक्षा विभाग भी बदनाम होने लगा है ।
ताजा मामले में सतना जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रीवा लोकायुक्त पुलिस ने एक माध्यमिक शिक्षक सह प्रभारी लेखापाल को ₹1200 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंगलवार दोपहर रामपुर बाघेलान क्षेत्र के सज्जनपुर संकुल केंद्र में की गई। आरोपी की पहचान महेंद्र पांडेय के रूप में हुई है।
आरोपी महेंद्र पांडेय पर ग्राम बरहा प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक मनोज प्रताप सिंह से क्रमोन्नति संबंधी फाइल आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। शिक्षक मनोज प्रताप सिंह ने इस संबंध में लोकायुक्त कार्यालय रीवा में शिकायत दर्ज कराई थी।
₹1200 लेते रंगे हांथों पकड़ा
शिकायत की सत्यता की जांच के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई। मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे लोकायुक्त टीम ने सज्जनपुर स्थित विद्यालय में दबिश दी। पूर्व निर्धारित योजना के तहत जैसे ही आरोपी लेखापाल ने शिकायतकर्ता से ₹1200 की रिश्वत ली, टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए और आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। लोकायुक्त टीम आरोपी लेखापाल को अपने साथ रीवा ले गई है, जहां आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
लोकायुक्त एसपी सुनील पाटीदार ने बताया कि आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। इस ट्रैप टीम में निरीक्षक संदीप सिंह भदौरिया और एस राम मरावी सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
लोकायुक्त अधिकारियों ने आमजन से अपील की कि यदि कोई भी शासकीय कर्मचारी किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी शिकायत तत्काल लोकायुक्त कार्यालय में करें, ताकि ऐसे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।













