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गांव की ​बेटियों के बढ़ते कदम : कनिका बिश्नोई ने प्रथम प्रयास में पूर्ण किया सीए बनने का स्वप्न, परिवार का साथ ओर विश्वास बना सफलता का कारण

हरदा। शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और लक्ष्य के प्रति अडिग संकल्प जब मिल जाते हैं, तो सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है नीमगांव (हरदा) की बेटी कुमारी कनिका बिश्नोई ने, जिन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की परीक्षा को अपने प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।आज के दौर में जहाँ युवा अक्सर असफलता से घबरा जाते हैं, वहीं कनिका बिश्नोई की यह यात्रा सिखाती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में उसे पाने की दृढ़ इच्छाशक्ति, तो प्रथम प्रयास में ही बड़ी से बड़ी बाधा पार की जा सकती है।

​कुमारी कनिका की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनके परिजनों, इष्ट मित्रों और समस्त क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। यह सफलता न केवल बिश्नोई परिवार के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि संपूर्ण हरदा जिले की बेटियों के लिए एक महान प्रेरणा है।

विरासत में मिली शिक्षा और संस्कारों की जीत

​कनिका की यह उपलब्धि मात्र एक डिग्री नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों के सपनों का मिलन है। कनिका के नाना, विष्णु राजोरिया आर्ट एंड कॉमर्स कॉलेज खिरकिया के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रोफेसर जी. आर. सारण ने इस अवसर पर भावुक होते हुए कहा कि मेरा स्वयं का सपना सीए बनने का था, जो किन्हीं कारणों से उस समय पूर्ण न हो सका। मेरी हमेशा से यह आकांक्षा थी कि परिवार का कोई सदस्य इस मार्ग पर चले। आज मेरी नातिन कनिका ने अपने पहले ही प्रयास में सफलता पाकर न केवल मेरा मान बढ़ाया, बल्कि मेरे उस पुराने सपने को भी साकार कर दिया।​

वकील सरपंच पिता बढ़ाते रहे बेटी का हौसला

पेशे से वकील, कर्म से किसान ग्राम पंचायत नीमगांव के सरपंच बृजमोहन विश्नोई ने चर्चा करते हुए कहा कि इस सफलता की नींव में कनिका की कड़ी मेहनत और उनके अनुशासित शिक्षण है। वहीं एक पिता के रूप में श्री बिश्नोई ने कनिका के अभ्यास और एकाग्रता पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने न केवल कनिका को उत्साहित किया, बल्कि कठिन समय में भी बच्चों के साथ खड़े रहकर यह सिद्ध किया कि यदि अभिभावकों का सहयोग और विश्वास साथ हो, तो बेटियाँ आसमान छू सकती हैं।​ कनिका ने इंदौर के एक निजी संस्थान के माध्यम से नियमित अध्ययन और अनुशासित दिनचर्या का पालन किया। बिना विचलित हुए अपनी रेगुलर मेहनत को ही उन्होंने अपनी सफलता का मूलमंत्र बनाया।

 

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