टिमरनी । भारतीय किसान संघ तहसील टिमरनी द्वारा आज 26 सूत्रीय मांग को लेकर एक दिवसीय धरना आंदोलन तहसील कार्यालय टिमरनी के सामने रखा गया । धरना समापन पर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौपा गया । इस दौरान काफी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों की प्रमुख मांगे
सरकार की चुनावी घोषणा अनुसार वर्तमान रवि सीजन में गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीदा जावे।
मक्का फसल की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जावे, क्योंकि वर्तमान बाजार में मक्का फसल किसानों से ओने पोने दाम पर खरीद कर लूट की जा रही है, एवं सभी फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदा जावे।
भावांतर योजना अंतर्गत मॉडल रेट से समर्थन मूल्य के बीच के अंतर की राशि सभी रजिस्टर्ड किसानों को उपलब्ध कराई जावे,जैसे 3500 रूपये क्विंटल से कम विकी सोयाबीन पर भी भावांतर राशि दी जावे।
मंडी में आने वाली समस्त एफ.ए.क्यू.फसलों की बोली व्यापारियों द्वारा समर्थन मूल्य से नीचे नहीं लगाई जावे।
मंडी समिति, कोऑपरेटिव सोसाइटी एवं जल उपभोक्ता संथाओं के चुनाव शीघ्र कराए जावें।
खरीफ वर्ष 2025 में अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का बीमा एवं शेष रही मुआवजा की राशि शीघ्र दिलाई जावे।
रजिस्ट्रेशन के समय लगाए गए खोटनामें स्टांप पेपर अनुसार मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जावे।
विगत दिनों शासन द्वारा आदेश दिया गया कि 2 फरवरी से पूर्व का खोटनामा अनिवार्य किया गया एवं 1000 रूपये का स्टांप और दोनों पक्ष का मोबाइल नंबर ओ.टी. पी.भी अनिवार्य किया गया है,जो कि गलत है,इसे पूर्व की तरह मात्र 100 रूपये के स्टांप पर साधारण शपथ पत्र (खोट नामा) को ही स्वीकृत किया जावे।
सिंचाई के लिए दिन में 12 घंटे रेगुलर बिजली उपलब्ध कराई जावे, मेंटेनेंस के नाम पर अघोषित कटौती नहीं की जावे।
कृषि पंपों पर बड़ाए गए मनमाने लोड की जांच कराकर पुनः सुधारे जावें।
ग्रीष्म कालीन मूंग फसल हेतु सभी नहरों में पानी उपलब्ध कराया जावे, वर्तमान में चल रहे पानी को आवश्यकता अनुसार नहरों में छोड़ा जावे एवं पानी की बर्बादी पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जावे।
तवा सिंचाई परियोजना में सिंचाई से वंचित ग्रामों को सहीद इलापसिंह सिंचाई परियोजना में जोड़ा जावे।
मोरंड-गंजाल सिंचाई परियोजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जावे।
ई टोकन के माध्यम से दिए जाने वाले खाद में कोऑपरेटिव सोसायटी को पहली प्राथमिकता से खाद उपलब्ध कराया जावे, ताकि किसानों को 0% ब्याज का फायदा मिल सके।
कोऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा किसानों की पूर्ण लिमिट अनुसार खाद एवं नगद राशि उपलब्ध कराई जावे।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जावें।
फसल बीमा योजना को पारदर्शी बनाया जावे,जैसे उसमें दावा क्लेम की दिनांक, फसल नुकसान की सर्वे रिपोर्ट एवं पंचनामा रिपोर्ट आदि ।
सरकार द्वारा की जाने वाली अधिग्रहित कृषि भूमि का सरकारी गाइडलाइन से चार गुना मुआवजा दिया जावे।
अविवादित नामांतरण बंटवारे का सरलीकरण कर उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नामांतरण बंटवारे किए जावें।
हर महीने ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर अविवादित नामांतरण,फौती नामांतरण,पारिवारिक उत्तराधिकारी पत्र आदि का नामांतरण किया जावे।
तहसील के समस्त गोहो का सीमांकन कराकर, सीमा चिन्ह लगाकर, बजरीकरण कराया जावे।
लोकवानिकी अंतर्गत लगाए गए सागौन के पौधों को खसरे नंबर में दर्ज किया जावे, ताकि भविष्य में किसानों को कटाई के समय समस्या का सामना नहीं करना पड़े।
टिमरनी में टिमरनी करताना मार्ग पर किए गए अतिक्रमण को तुरंत हटाया जावे।
टिमरनी पोखरनी बायपास मार्ग का पुनःर्निर्माण कराया जावे।
त्रिवेणी संगम गोंदागांव गंगेश्वरी को पर्यटन स्थल घोषित किया जावे।
भारतीय किसान संघ द्वारा पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, शीघ्र कार्यवाही की जावे।
आंदोलन की अध्यक्षता नारायण पटवारे चौकड़ी ने की एवं भारतीय किसान संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष नरेंद्र दोगने, विनोद पाटिल, श्याम पाटिल, दीपचंद नवाद, रामकृष्ण राजपूत, राजेश डूडी, संतोष लछोरा, शैतान सिंह राजपूत, कुंवर सिंह राजपूत मुरली पाटिल, पुरुषोत्तम छालोतरे, विष्णु यदुवंशी, बलवीर राजपूत, रामशंकर यदुवंशी, जितेंद्र राजपूत सहित काफी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।












