पंचकल्याणक महोत्सव का हुआ समापन, नगर में निकली भव्य शोभायात्रा
हरदा । टिमरनी नगर में चल रहे जैन समाज के पाषाण से भगवान बनाने का महोत्सव श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव का आज भगवान के मोक्ष प्राप्ति के साथ हर्षोल्लास से समापन हो गया । प्रात:काल शुभबेला में भगवान को मोक्ष प्राप्त होने के पश्चात मुनिश्री निर्णयसागर महाराज के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी वाणी भूषण विनय भैय्या बंडा ने मोक्ष कल्याणक के बाद भी धार्मिक क्रियाओं को संपन्न करवाया । मुनिश्री निर्णयसागर महाराज ने भगवान जी की प्रतिमाओं को सूर्य मंत्र देकर प्रतिष्ठा की, जिस पर उपस्थित श्रावकों में हर्ष व्याप्त हो गया ओर पूरा परिसर भगवान की जय जयकारा से गुंजायमान हो गया । इस अवसर पर मोक्षकल्याणक की मांगलिक क्रियाएं हुईं। सुबह ज्ञान कल्याणक पूजन और शांति हवन हुआ। भगवान आदिनाथ को निर्वाण प्राप्ति हुई। अग्नि कुमार देवों का आगमन हुआ। नख-केश विसर्जन, सिद्ध गुणारोपण विधि, सिद्ध पूजन और मोक्ष कल्याणक पूजन के साथ विश्व शांति महायज्ञ हुआ।
पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष आलोक जैन, मंदिर समिति अध्यक्ष सुरेन्द्र जैन एवं कोषाध्यक्ष राजीव जैन ने बताया कि दोपहर में गजरथ शोभायात्रा निकाली गई। इसमें भगवान के माता-पिता, सौधर्मेंद्र, कुबेर, विधिनायक और समस्त इंद्र रथों पर सवार थे। श्रीजी की प्रतिमाओं को नगर में भ्रमण कराते हुए नवनिर्मित पाषाण के जिनालय में ले जाकर मार्बल की वेदि पर विराजमान किया गया। श्रीजी की शोभायात्रा टिमरनी नगर के लिए ऐतिहासिक बन गई, शोभायात्रा में गजराज, रथ, बग्गी, पालकी के सिलवानि से आये जैन नवयुवक संघ का दिव्य बैंड ओर अखाड़ा चल रहा था ।
शोभायात्रा में शामिल मुनिश्री के नगर की समस्त समाजों द्वारा चरण प्रक्षालन कर एवं भगवान की आरती उतार कर हर्ष व्यक्त किया । सात दिन चले श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक महोत्सव में हरदा जिले के साथ ही प्रदेश भर के जैन धर्मावलम्बी शामिल हुए ओर आयोजन के साक्षी बने।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि निर्णयसागर महाराज ने मोक्ष क्या होता है इसपर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन धर्म की मान्यता दुनिया के सभी सिद्धांतों से अलग है। जैन धर्म का मानना है कि अनादि काल से आत्मा और कर्मों का सहयोग रहता है, जो आत्मा को संसार में दु:खी करती है। इस दु:ख के कारण उसे जन्म, मरण की प्राप्ति होती है, जो संसार के सबसे बड़े दु:ख कहलाते हैं। जब तक जन्म मरण का चक्कर चलता रहेगा, तब तक तो दु:खों से मुक्ति प्राप्त नहीं होगी, जन्म व मरण को देने वाले होते हैं कर्म। कर्मों के कारण संसारी प्राणी दु:ख भोगता है और त्याग, तपस्या करके इन कर्मों का आत्मा से विच्छेद किया जाता है। जब कर्म और आत्मा एक दूसरे से एकदम अलग हो जाते हैं, तो ऐसी दशा को आत्मा का मोक्ष माना जाता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की शान को बढ़ाने में अगर हमारे प्राण भी चले जाएं, तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। बाल ब्रह्मचारी विनय भैय्या ने कहा कि इसी तरह से जैन धर्म की भक्ति में लगे रहना और अपनी आत्मा के कल्याण के पद पर बढ़ते रहना।
विश्व शांति महायज्ञ क्यों किया जाता है –
उन्होंने बताया कि जब हम कोई धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, भगवान की भक्ति करते हैं अथवा कोई भी कार्य करते हैं, तो उसमें गलतियां होना त्रुटियां होना स्वाभाविक है। इन त्रुटियों की क्षमा याचना करने के लिए और विश्व के प्रत्येक प्राणी का कल्याण हो ऐसी भावना से ओत-प्रोत होकर ही विश्व शांति महायज्ञ किया जाता है। विज्ञान के अनुसार हमारे आसपास बहुत सी नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है और इस ऊर्जा को हवन, मंत्रों के माध्यम से नष्ट करने की प्रक्रिया का नाम है विश्व शांति महायज्ञ है।
नगर कि जैन समाज के ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव को टिमरनी जैन समाज के अध्यक्ष दीपक जैन के साथ उनकी टीम के कुबेर जैन राजेश जैन पुखराज जैन अर्पित जैन आयुष जैन पारस जैन प्रखर जैन प्रियंक जैन यश भारत जैन क्षितिज जैन शीर्ष जैन, उदित उद्देश्य जैन सहित हरदा जैन समाज के सरगम जैन, राजीव जैन, संजय जैन, राहुल जैन, आकाश जैन आदि युवाओं की टीम ने सफल बनाया ।














