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अब बार-बार नवीनीकरण कराने का झंझट खत्म,रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस को मिलेगी आजीवन वैधता : सरगम जैन जिलाध्यक्ष कैट

जिसका भी खाने-पीने का कारोबार है उसके लिए खुशखबर

हरदा (सार्थक जैन)। अब खाद्य नियामक एफएसएसएआई के लाइसेंस का बार-बार नवीकरण कराने का झंझट खत्म हो गया है।FSSAI ने रजिस्ट्रेशन को आजीवन वैधता दे दी है।साथ ही टर्नओवर लिमिट और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए नियमों में बड़े बदलाव किए हैं।एमएसएमई और कारोबारियों को इससे फायदा होगा। उक्त जानकारी देते हुए कैट जिलाध्यक्ष सरगम जैन ने बताया कई ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने की दिशा में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण(एफएसएसएआई) ने एक बड़ा कदम उठाया है। फूड रेगुलेटर ने घोषणा की कि अब उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और लाइसेंस की वैधता आजीवन होगी।

इस फैसले के बाद फूड बिजनेस से जुड़े कारोबारियों को अब अपने लाइसेंस बार-बार रिन्यू कराने की आवश्यकता नहीं होगी।स्वास्थ्य मंत्रालय ने 10 मार्च से कई व्यापक विनियामक और प्रक्रियात्मक सुधारों को अपनी मंजूरी दे दी है।टर्नओवर लिमिट में भी बड़ा बदलाव किया गया है,नियामक बोझ को कम करने के लिए लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन की टर्नओवर सीमा में भी अहम बदलाव किए गए हैं। FSSAI ने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से रजिस्ट्रेशन के लिए टर्नओवर की सीमा को 12 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया जाएगा।अब 50 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए स्टेट लाइसेंस की आवश्यकता होगी, जबकि 50 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर वाले व्यवसायों पर सेंट्रल लाइसेंसिंग के नियम लागू होंगे।

कैट के राष्ट्रीय महासचिव और चाँदनी चौक दिल्ली के सांसद प्रवीन खंडेलवाल कै हवाले से हरदा जिलाध्यक्ष सरगम जैन ने बताया कि रिन्यूअल से मुक्ति मिलेगी और लागत भी कम होगी एसएफ़एसई रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस पहले एक से पांच साल तक की अवधि के लिए जारी किए जाते थे।आजीवन वैधता मिलने से सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए कंप्लायंस कॉस्ट (अनुपालन लागत) घटेगी,कागजी कार्रवाई कम होगी और लाइसेंसिंग अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने की जरूरत खत्म होगी। इससे ऑपरेशन्स में सुधार आएगा।10 लाख स्ट्रीट वेंडर्स को राहत मिलेगी।दोहरे अनुपालन की समस्या को खत्म करने के लिए,नगर निगमों या टाउन वेंडिंग कमेटियों (स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014) के तहत रजिस्टर्ड स्ट्रीट फूड वेंडर्स को FSSAI के तहत ‘डीम्ड रजिस्टर्ड’ माना जाएगा।इससे 10 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को कई विभागों में चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और वे अपनी आजीविका और स्वच्छता पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

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