नजरिए को बदलें, दुनिया अच्छी नजर आएगी – राष्ट्र-संत ललितप्रभ जी

नजरिए को बदलें, दुनिया अच्छी नजर आएगी – राष्ट्र-संत ललितप्रभ जी

नगर आगमन पर संतों का सकल समाज के द्वारा किया गया धूमधाम से स्वागत

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लोकमतचक्र.कॉम।

हरदा । दुनिया में अच्छाइयाँ भी हैं और बुराइयाँ भी, आपको वही नजर आयेगा जैसा आपका नजरिया है। अच्छी दुनिया को देखने के लिए नजारों को नहीं, नजरिये को बदलिए। केवल अच्छे लोगों की तलाश मत करते रहिए, खुद अच्छे बन जाइए। आपसे मिलकर शायद किसी की तलाश पूरी हो जाए। उक्त उद्गार राष्ट्र संत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने स्थानीय जैन श्री विद्यासागर भवन में व्यक्त करते हुए कहा कि लोग कहते हैं जब कोई अपना दूर चला जाता है तो तकलीफ होती है। परंतु असली तकलीफ तब होती है जब कोई अपना पास होकर भी दूरियाँ बना लेता है। किसी को सजा देने से पहले दो मिनट रुकि ये। याद रखिये, अगर आप किसी की एक गलती माफ करेंगे,  तो भगवान आपकी सौ गलतियाँ माफ करेगा। गलती जिंदगी का एक पेज है, पर रिश्ते जिंदगी की किताब। जरूरत पडने पर गलती का पेज फाड़िए, एक पेज के लिए पूरी किताब फाडने की भूल मत कीजिए। उन्होंने कहा कि बड़ी सोच के साथ दो भाई 40 साल तक साथ रह सकते हैं वहीं छोटी सोच उन्हीं भाइयों को 40 मिनट में अलग कर सकती है। भाई के प्रति हमेशा बड़ी सोच रखिए, क्योंकि दुख-दर्द में वही आपका सबसे सच्चा मित्र साबित होगा।

संत ललितप्रभ रविवार को सकल जैन समाज द्वारा खेड़ीपुरा स्थित दिगंबर जैन आचार्य श्री विद्यासागर भवन में आयोजित जीने की कला प्रवचन माला के दौरान जीवन को कैसे स्वर्ग बनाए विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पैर में मोच और दिमाग में छोटी सोच आदमी को कभी आगे नहीं बढने देती। कदम हमेशा सम्हलकर रखिए और सोच हमेशा ऊँची। एक मिनट में जिंदगी नहीं बदलती, पर एक मिनट में सोचकर लिया गया फैसला पूरी जिंदगी बदल देता है। उन्होंने कहा कि केवल किस्मत के भरोसे मत बैठे रहिये। जीवन में योग्यताओं को हासिल कीजिए। किस्मत से कागज तो उड़ सकता है, पर पतंग तो काबिलियत से ही उड़ेगी। याद रखें, भाग्य हाथ की रेखाओं में नहीं अपितु व्यक्ति के पुरुषार्थ में छिपा है। इस दुनिया में नसीब तो उनका भी होता है जिनके हाथ नहीं होते।

उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढने के लिए आत्मविश्वास जगाइये। खाली बोरी कभी खड़ी नहीं रह सकती और तकिये से कभी कील ठोकी नहीं जा सकती। याद रखिए, पुरी दुनिया में इंसान ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो उठना चाहे तो देवता से भी उपर उठ सकता है और गिरना चाहे तो जानवर से भी नीचा गिर सकता है। हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है। मान लिया तो हार और ठान लिया तो जीत। जो लोग अपने हाथों का उपयोग हाथ पर हाथ रखने के लिए करते हैं, वे हमेशा खाली हाथ ही बैठे रहते हैं। भाग्य की रेखाएँ चमकाने के लिए लक्ष्य के साथ मेहनत कीजिए, आप पाएँगे आपकी किस्मत केवल चार कदम दूर थी। 

उन्होंने कहा कि भाग्य को हरा-भरा रखने के लिए  सदा सत्कर्म का पानी डालते रहिये। आखिर हरी घास तभी तक हरी रहेगी, जब तक उसे पानी मिलता रहेगा। जीवन में केवल लाभ ही मत कीजिए  कभी उसे पलट कर लोगों का भला भी कीजिए। अगर हम पेंसिल बनकर किसी के लिए सुख नहीं लिख सकते तो कम-से-कम रबर बनकर उनके दुख तो मिटा ही सकते हैं। घर में खाना बनाते समय एक मुट्ठी आटा अतिरिक्त भिगोएँ और सुबह पूजा करते समय 10 रुपए दूसरों की मदद के लिए गुल्लक में डालें। एक मुट्ठी आटे की रोटियाँ तो दुकान जाते समय गाय-कुत्तों को डाल दें और नगद राशि को इकट्ठा होने पर किसी बीमार या अपाहिज की मदद में लगा दें। मात्र नौ महिने में आपके सारे ग्रह-गोचर अनुकूल हो जाएँगे।

उन्होंने कहा कि रास्ते से गुजरते समय मंदिर आने पर आप प्रार्थना में हाथ जोड़ें और अगर कोई एंबुलेंस गुजऱती नजऱ आए तो उसे देखकर उसके लिए ईश्वर से दुआ अवश्य करें। संभव है आपकी दुआ उसे नया जीवन दे दे। अगर आप किसी मज़दूर से दिनभर मेहनत करवाते हैं तो उसका पसीना सूखे उससे पहले उसे उसका मेहनताना दे दीजिए। किसी के मेहनताने को दबाना हमारे आते हुए भाग्य के कदमों पर दो कील ठोकना है। विद्यालय भी ईश्वर के ही मंदिर हुआ करते हैं, पर विद्यालय बनाना हर किसी के बूते की बात नहीं होती। आप केवल किसी एक गरीब बच्चे की पढ़ाई को गोद ले लीजिए, आपको विद्यालय बनाने जैसा पुण्य ही मिलेगा।

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राष्ट्रसंत ने कहा कि दूध का सार मलाई है, पर जीवन का सार दूसरों की भलाई है। हमें रोज छोटा-मोटा ही सही पर एक भलाई का काम जरुर करना चाहिए। बिल गेट्स और अजीम प्रेमजी जैसे अमीरों ने दुनिया की भलाई के लिए हजारों करोड रुपयों की चैरिटी की है। आप फूल-पांखुरी ही सही, चैरिटी के काम अवश्य करें। दुनिया में कुछ लोग खाकर राजी होते हैं, कुछ लोग खिलाकर। आप प्रभु से प्रार्थना कीजिए कि प्रभु सदा इतना समर्थ बनाए रखना कि मैं औरों को खिलाकर खुश होने का सौभाग्य प्राप्त करूँ।

इससे पूर्व मुनि शांतिप्रिय सागर ने कहा कि गुस्सा इंसान को बर्बादी की तरफ ले जाता है। गुस्से में अगर नौकरी छोड़ोगे तो करियर बर्बाद होगा, मोबाइल तोड़ोगे तो धन बर्बाद होगा, परीक्षा न दोगे तो वर्ष बर्बाद होगा और पत्नी पर चिल्लाओगे तो रिश्ता खराब होगा क्योंकि गुस्सा हमारा मुंह खोल देता है पर आंखें बंद कर देता है। यह पागलपन से शुरू होता है और प्रायश्चित पर पूरा होता है। उन्होंने कहा कि गुस्सा करने से पहले सौ बार सोचें, इससे लाभ नहीं नुकसान ही होना है। जो काम रुमाल से निपट सकता है भला उसके लिए रिवाॅल्वर का उपयोग क्यों किया जाए।

उन्होंने कहा कि गुस्सा आ भी जाए तब भी वाणी पर नियंत्रण रखने की कोशिश कीजिए नहीं तो आप हानि उठाएंगे। मां के पेट से निकला बच्चा और मुंह से निकले बोल वापस कभी अंदर नहीं जाते। उन्होंने कहा कि अगर गुस्सा करना ही है तो किसी को सुधारने के लिए करें, अहंकार जताने या किसी को नीचा दिखाने के लिए गुस्सा ना करें।

गुस्से को जीतने के टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि विरोध के वातावरण में भी मुस्कान को तवज्जो दीजिए, गुस्से को जीतने के लिए क्रोध के वातावरण से दूर रहिए, मौन का अभ्यास बढ़ाइए, सकारात्मक व्यवहार कीजिए, विनोदी स्वभाव के मालिक बनिए, सप्ताह में 1 दिन क्रोध का उपवास अवश्य कीजिए। अगर आप शांति के वातावरण में क्रोध करते हैं तो दुनिया की नजर में आप उग्रवादी कहलाएंगे वहीं यदि क्रोध के वातावरण में भी आप शांत रहेंगे तो किसी देवदूत की तरह पहचाने जाएंगे।

इससे पूर्व राष्ट्रसंतों के शहर आगमन पर श्रद्धालुओं द्वारा धूमधाम से स्वागत किया गया। प्रवचन कार्यक्रम में अनेक श्रद्धालु उपस्थित थे। समाज के प्रशांत बाफना ने बताया कि राष्ट्र संतों के सोमवार को सुबह 9:00 बजे तिमरानी के तारण पंथ भवन में जीने की कला पर प्रवचन और सत्संग आयोजन होगा।

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